Thursday, June 11, 2026
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मेहरचंद के प्रिंसिपल ने CM मान को लिखा पत्र, इलेक्शन वीर और जनगणना वीर की भर्ती का दिया सुझाव

by News 360 Broadcast

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यह व्यवस्था हमारी शिक्षा व्यवस्था को बचाने का एक प्रभावी समाधान: डॉ जगरूप सिंह

जालंधर: शहर के मेहर चंद पॉलिटेक्निक कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. जगरूप सिंह ने पंजाब के मुख्यमंत्री सरदार भगवंत सिंह मान को एक पत्र लिखकर ‘इलेक्शन वीर’ और ‘जनगणना वीर’ के रूप में युवाओं की अस्थायी भर्ती का सुझाव दिया है ताकि चुनावों और जनगणना के दौरान टीचर्स की पढ़ाई-लिखाई से जुड़ी ड्यूटी में कोई रुकावट न आए।

प्रिंसिपल डॉ जगरूप सिंह ने अपने पत्र में लिखा कि उनका मानना है कि लाखों रुपये वेतन पाने वाले शिक्षकों की नियुक्ति विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा प्रदान करने के लिए और उनके भविष्य को संवारने के लिए दी जाती है। लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि इन्हीं शिक्षकों को पूरे वर्ष बी.एल.ओ. ड्यूटी, चुनावी कार्यों तथा वर्तमान में चल रही जनगणना जैसे गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगा दिया जाता है, जिनसे इनकार करने की उनके पास कोई गुंजाइश नहीं होती। लेकिन सरकार यह भूल जाती है कि यदि शिक्षक लगातार ऐसे कार्यों में ही व्यस्त रहेंगे तो वे भविष्य के वैज्ञानिक, इंजीनियर, डॉक्टर, वकील, लेखक, चित्रकार और नेता कैसे तैयार करेंगे? इससे न केवल विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होती है, बल्कि सरकारी खजाने से शिक्षकों के वेतन पर खर्च की जा रही करोड़ों रुपये की राशि का उद्देश्य भी अधूरा रह जाता है।

उन्होंने आगे कहा कि माननीय मुख्यमंत्री जी को मेरा सुझाव है कि हमारे रोजगार कार्यालयों में हजारों बेरोजगार युवाओं के बायोडाटा पड़े रहते हैं और प्रतिदिन सैकड़ों युवा रोजगार की तलाश में इन कार्यालयों के चक्कर लगाते हैं। यदि इन्हीं रोजगार कार्यालयों के माध्यम से अग्निवीर योजना की तर्ज पर बेरोजगार युवाओं को इलेक्शन वीर/इलेक्शन बहन तथा जनगणना वीर/जनगणना बहन के रूप में भर्ती किया जाए, तो पंजाब ही नहीं बल्कि देश के अन्य राज्यों की तस्वीर भी बदल सकती है। उन्होंने कहा कि यह युवा नए उत्साह और ऊर्जा के साथ इन कार्यों को संपन्न करेंगे। कार्य पूरा होने के बाद उन्हें प्रमाण-पत्र एवं कौशल प्रमाण-पत्र दिए जाएं, जिनमें यह उल्लेख हो कि उन्होंने सफलतापूर्वक चुनाव अथवा जनगणना का कार्य किया है। इन प्रमाण-पत्रों को सरकारी नौकरियों में वरीयता दी जाए अथवा इसके लिए अलग से कोटा निर्धारित किया जाए।

आगे उन्होंने पत्र में यह भी लिखा कि मेरा विश्वास है कि यह निर्णय पंजाब ही नहीं, बल्कि पूरे भारत के लिए नए अवसरों के द्वार खोल सकता है। इसके साथ ही इस योजना से शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों के बोझ से मुक्ति मिलेगी, जिसके चलते विद्यालयों में शिक्षक पूरे समय उपलब्ध रहेंगे और वे बिना किसी अतिरिक्त ड्यूटी के विद्यार्थियों को पूर्ण समर्पण के साथ शिक्षा प्रदान कर सकेंगे। वास्तव में, इससे शिक्षा के क्षेत्र में एक नई क्रांति आ सकती है।

अंत में उन्होंने मुख्यमंत्री मान से कहा कि जब तक शिक्षकों के सिर से गैर-शैक्षणिक कार्यों का बोझ नहीं हटाया जाता, तब तक पंजाब को शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाना कठिन रहेगा। इस व्यवस्था से दोहरा लाभ होगा। एक ओर शिक्षक पूरे मनोयोग से बच्चों के भविष्य को संवारने में जुट सकेंगे, वहीं दूसरी ओर बेरोजगार युवा इलेक्शन वीर/बहन अथवा जनगणना वीर/बहन बनकर कम मानदेय पर भी अनुभव और कौशल प्राप्त कर अपने सुनहरे भविष्य के सपनों को साकार कर सकेंगे।

 

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