
न्यूज़ 360 ब्रॉडकास्ट
जालंधर: शहर के हंस राज महिला महाविद्यालय में ‘कार्यकारी तनाव और कार्य-जीवन संतुलन’ विषय पर एक फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का सफलतापूर्वक आयोजन प्राचार्या डॉ. एकता खोसला जी के दिशा-निर्देशन में किया गया। यह कार्यक्रम एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी, पुणे के सहयोग एवं महाविद्यालय के इंडियन नॉलेज सिस्टम्स (आईकेएस) सेल के सौजन्य से किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ डी.ए.वी. गान से हुआ। कॉलेज परम्परानुसार उनका स्वागत ग्रीन प्लांटर भेट व स्मृति चिन्ह भेंट कर किया गया।


कार्यक्रम की शुरुआत प्रोग्राम संयोजक, इंचार्ज आई के सी सेल डॉ. रमनीता सैनी शारदा द्वारा अतिथि स्वागत एवं स्वागत भाषण के साथ हुई। उन्होंने मुख्य वक्ता का हार्दिक अभिनंदन करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की तथा इस विषय की वर्तमान समय में प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर कार्यकारी प्राचार्या डॉ नवरूप एवं डीन इनोवेशन आई. क्यू.ए.सी इंचार्ज डॉ. अंजना भाटिया व प्रोग्राम सह संयोजक डॉ श्वेता चौहान भी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में एमआईटी-डब्ल्यूपीयू के सहायक प्रोफेसर आकाश अरविंद होमकर उपस्थित रहे। उन्होंने अपने व्याख्यान में कार्यस्थल पर बढ़ते तनाव, उसके प्रभावों तथा संतुलित जीवन शैली के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने प्रतिभागियों को तनाव प्रबंधन के व्यावहारिक उपायों, समय प्रबंधन, मानसिक स्वास्थ्य तथा सकारात्मक सोच के महत्व के बारे में भी जागरूक किया। उन्होंने मेडिटेशन फ़ॉर डेटॉक्स एन्ड डिसिप्लिन पर व्यवहारिक चर्चा भी की।
कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को उनके व्यावसायिक एवं व्यक्तिगत जीवन के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए प्रेरित करना तथा उन्हें प्रभावी रणनीतियों से अवगत कराना था। उपस्थित फैकल्टी सदस्यों ने सत्र को अत्यंत ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक बताया। महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. एकता खोसला के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम ने शिक्षकों को अपने कार्यक्षेत्र में अधिक प्रभावी और संतुलित बनने के लिए नई दिशा प्रदान की।
इस अवसर पर कॉलेज की प्राचार्या डॉ. एकता खोसला ने अपने संदेश में कहा कि आज के प्रतिस्पर्धात्मक और व्यस्त जीवन में ‘कार्यकारी तनाव और कार्य-जीवन संतुलन’ जैसे विषय अत्यंत प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षकों का मानसिक और भावनात्मक संतुलन बनाए रखना न केवल उनके व्यक्तिगत जीवन के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह उनके शिक्षण कार्य की गुणवत्ता को भी प्रभावित करता है। मंच संचालन प्रोतिमा मंडेर द्वारा सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। अंत में प्रोग्राम सह संयोजन डॉ श्वेता चौहान द्वारा मुख्य वक्ता एवं सभी उपस्थित सदस्यों का धन्यवाद ज्ञापित किया गया तथा भविष्य में भी ऐसे ज्ञानवर्धक कार्यक्रम आयोजित करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई।
