
न्यूज़ 360 ब्रॉडकास्ट
जालंधर: शहर के हंसराज महिला महाविद्यालय के स्नातकोत्तर जूलॉजी विभाग द्वारा प्राचार्या डॉ. (श्रीमती) एकता खोसला के कुशल मार्गदर्शन में मृदा एवं पौधों की जड़ों से नेमाटोड का पृथक्करण एवं पहचान विषय पर एक सेमिनार-सह-कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को नेमाटोलॉजी तथा कृषि अनुसंधान से संबंधित महत्वपूर्ण तकनीकों का सद्धांतिक ज्ञान एवं व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना था।


इस सेमिनार की मुख्य वक्ता डॉ. पूजा ओहरी, प्रोफेसर, जूलॉजी विभाग, गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर रहीं। कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्या डॉ. एकता खोसला एवं डॉ. सीमा मारवाहा, डीन अकादमिक्स एवं विभागाध्यक्ष, जूलॉजी विभाग द्वारा मुख्य अतिथि को ग्रीन प्लांटर भेंट कर किया। डॉ. पूजा ओहरी ने अपने व्याख्यान में कृषि में पादप परजीवी नेमाटोड्स के महत्व तथा फसल उत्पादकता पर उनके प्रभाव को विस्तार से बताया। उन्होंने नेमाटोड प्रबंधन के लिए पर्यावरण अनुकूल उपायों पर प्रकाश डाला तथा सतत कृषि पद्धतियों के महत्व पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों को अपने शैक्षणिक अनुभव साझा करते हुए शोध कार्य में समर्पण और निरंतरता के लिए प्रेरित किया। उनका व्याख्यान विद्यार्थियों के लिए अत्यंत प्रेरणादायक रहा और उन्हें वैज्ञानिक अनुसंधान के नए आयामों की ओर अग्रसर किया।
सेमिनार के उपरांत एक प्रत्यक्ष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया, जिसका संचालन शोधार्थी रूही एवं विक्रम ने किया, जो डॉ. ओहरी के निर्देशन में नेमाटोलांजी लैब, जीएनडीयू, अमृतसर में कार्यरत हैं। इस कार्यशाला में उन्होंने मृदा एवं पौधों के नमूनों से नेमाटोड के पृथक्करण की तकनीकों का प्रदर्शन किया। साथ ही नेमाटोड निष्कर्षण, सूक्ष्मदर्शी अवलोकन एवं उनकी पहचान की प्रक्रियाओं को भी विस्तार से समझाया। प्रतिभागियों ने इस व्यावहारिक सत्र में सक्रिय रूप से भाग लिया और नेमाटोड नमूनों के अध्ययन का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त किया।
वहीं प्राचार्या डॉ. एकता खोसला ने विभाग को इस सफल आयोजन के लिए बधाई दी तथा भविष्य में भी ऐसे ज्ञानवर्धक कार्यक्रम आयोजित करने के लिए प्रेरित किया, जो विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं आवश्यक कौशल का विकास करें। कार्यक्रम के अंत में डॉ. सीमा मारवाहा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। इस आयोजन के संयोजक डॉ. साक्षी वर्मा एवं रवि कुमार, सहायक प्रोफेसर, जूलॉजी विभाग रहे। साइंस फैकल्टी के अन्य सदस्य भी इस कार्यक्रम में उपस्थित रहे। प्रयोगशाला टेक्निशियन सचिन ने कार्यक्रम की व्यवस्थाओं में महत्वपूर्ण सहयोग दिया।
