
न्यूज़ 360 ब्रॉडकास्ट
जालंधर: शहर के डी.ए.वी. कॉलेज के स्नातकोत्तर रसायन विज्ञान (केमिस्ट्री) विभाग की एस.एस. भटनागर केमिकल सोसायटी द्वारा 20 मार्च 2026 को विश्व जल दिवस के अवसर पर डी.बी.टी. (जैव प्रौद्योगिकी विभाग) द्वारा प्रायोजित एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जल संरक्षण के महत्व के प्रति जन-जागरूकता फैलाना तथा जल की कमी और उसके प्रबंधन से संबंधित विभिन्न समस्याओं को उजागर करना था।



इस कार्यक्रम में कुल 22 विद्यार्थियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया, जिनमें बी.एससी. के 15 छात्र तथा एम.एस.सी. केमिस्ट्री के 7 छात्र सम्मिलित थे। इस गतिविधि के अंतर्गत प्रत्येक छात्र ने जल संरक्षण के विभिन्न पहलुओं पर आधारित जानकारीपूर्ण एवं रचनात्मक पैम्फलेट तैयार किए। इन पैम्फलेट का वितरण विद्यार्थियों, कॉलेज कर्मचारियों तथा कॉलेज परिसर के बाहर आम नागरिकों के बीच किया गया, ताकि जागरूकता का प्रसार अधिक व्यापक स्तर पर हो सके।

इन पैम्फलेट के माध्यम से “जल बचाओ, जीवन बचाओ” तथा “हर बूंद अमूल्य है” जैसे प्रेरणादायक संदेश प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किए गए। पैम्फलेट में यह महत्वपूर्ण तथ्य भी रेखांकित किया गया कि यद्यपि पृथ्वी का अधिकांश भाग जल से आच्छादित है, फिर भी इसका केवल एक अत्यंत छोटा भाग ही मीठा और उपयोग योग्य जल है। इसके अतिरिक्त, जल संकट की बढ़ती समस्या और शीघ्र एवं ठोस कदम उठाने की आवश्यकता पर भी विशेष बल दिया गया।
विद्यार्थियों ने जल की बर्बादी के विभिन्न कारणों, जैसे लीक होते पाइप, कृषि क्षेत्र में अत्यधिक जल उपयोग, तथा औद्योगिक प्रदूषण आदि पर प्रकाश डाला। साथ ही, जल संरक्षण हेतु व्यावहारिक उपायों का सुझाव भी दिया गया, जिनमें वर्षा जल संचयन, कुशल सिंचाई प्रणाली, पाइपों की मरम्मत, जल का पुनः उपयोग, तथा दैनिक जीवन में जल बचाने की आदतें अपनाना (जैसे नल बंद रखना एवं शॉवर के स्थान पर बाल्टी का उपयोग करना) शामिल हैं।
इन पैम्फलेट में जल प्रदूषण से बचाव तथा पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने हेतु प्राकृतिक जल संसाधनों की सुरक्षा का संदेश भी दिया गया। रंगीन डिजाइन, चित्रों तथा सरल भाषा के प्रयोग ने इन पर्चों को आकर्षक एवं जनसामान्य के लिए सहज रूप से समझने योग्य बनाया। कुल मिलाकर यह कार्यक्रम अत्यंत सफल रहा। इसने न केवल विद्यार्थियों के ज्ञान एवं रचनात्मकता को बढ़ावा दिया, बल्कि जल संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता फैलाने तथा इस महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन के जिम्मेदार उपयोग को प्रोत्साहित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
