मोहाली में राष्ट्रीय जीनोम संपादन एवं प्रशिक्षण केंद्र शुरू हुआ, युवाओं को लाभ होगा - News 360 Broadcast
मोहाली में राष्ट्रीय जीनोम संपादन एवं प्रशिक्षण केंद्र शुरू हुआ, युवाओं को लाभ होगा

मोहाली में राष्ट्रीय जीनोम संपादन एवं प्रशिक्षण केंद्र शुरू हुआ, युवाओं को लाभ होगा

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न्यूज़ 360 ब्रॉडकास्ट (नेशनल न्यूज़ ) : National Genome Editing and Training Center started in Mohali, youth will be benefited : केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री एवं पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज राष्ट्रीय कृषि-खाद्य जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (एनएबीआई) मोहाली, पंजाब में ” राष्ट्रीय जीनोम संपादन एवं प्रशिक्षण केंद्र (एनजीईटीसी)” का उद्घाटन किया।

राष्ट्रीय जीनोम संपादन एवं प्रशिक्षण केंद्र (नेशनल जीनोम एडिटिंग एंड ट्रेनिंग सेंटर एनजीईटीसी)“ का कल उद्घाटन किया गया, यह एक ही परिसर वाली अत्याधुनिक सुविधा है, जो मध्यस्थता जीनोम संशोधन सहित क्‍लस्‍टर्ड रेग्‍युलरली इंटरस्‍पेस्‍ड शॉर्ट पैलिनड्रॉमिक रिपीट्स– सीएएस (सीआरआईएसपीआर- कैस) की विभिन्न जीनोम संपादन विधियों को अनुकूलित करने के लिए क्षेत्रीय जरूरतों को पूरा करने के उद्देश्य से एक राष्ट्रीय मंच के रूप में काम करेगी । यह युवा शोधकर्ताओं को फसलों में इसकी जानकारी और अनुप्रयोग के बारे में प्रशिक्षण और मार्गदर्शन प्रदान करके उन्हें सशक्त भी बनाएगा । एनएबीआई ने यह क्षमता दिखाई है और वह केले, चावल, गेहूं, टमाटर, मक्का और बाजरा सहित फसलों की विशाल श्रुंखला में जीनोम संपादन प्रविधियों का विस्तार कर सकता है।

वर्तमान जलवायु परिदृश्य में, बेहतर पोषण और बदलती पर्यावरणीय परिस्थितियों के प्रति सहनशीलता के लिए फसलों में सुधार करना एक महत्वपूर्ण चुनौती है। जीनोम सम्पादन (एडिटिंग) एक ऐसी आशाजनक तकनीक हो सकती है जिसे भारतीय अनुसंधान फसलों में वांछित पूर्व–निर्धारित (टेलर–मेड) लक्षणों की प्रस्तुति करने के लिए अपनाया जा सकता है।

खाद्य और पोषण सुरक्षा पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन – आईएफएएनएस – 2023 का आयोजन राष्ट्रीय कृषि- खाद्य जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (एनएबीआई), सेंटर फॉर इनोवेटिव एंड एप्लाइड बायोप्रोसेसिंग (सीआईएबी), राष्ट्रीय पादप जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ प्लांट बायोटेक्नोलॉजी – एनआईपीबी), और मोहाली स्थित एनएबीआई के अंतर्राष्ट्रीय जेनेटिक इंजीनियरिंग और जैव प्रौद्योगिकी केंद्र द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है। इस 4 दिवसीय सम्मेलन में यह मंथन किया जाएगा कि कैसे जीनोम एडिटिंग देश में बदलती जलवायु के अंतर्गत देश की खाद्य और पोषण सुरक्षा को बढ़ा सकती है

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