DAV कॉलेज जालंधर में डॉ. भीमराव अम्बेडकर के जीवन और दर्शन पर व्याख्यान आयोजित किया गया - News 360 Broadcast
DAV कॉलेज जालंधर में डॉ. भीमराव अम्बेडकर के जीवन और दर्शन पर व्याख्यान आयोजित किया गया

DAV कॉलेज जालंधर में डॉ. भीमराव अम्बेडकर के जीवन और दर्शन पर व्याख्यान आयोजित किया गया

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न्यूज़ 360 ब्रॉडकास्ट (एजुकेशन न्यूज़ ,जालंधर ): Lecture on life and philosophy of Dr. Bhimrao Ambedkar organized at DAV College Jalandhar :गत दिनों स्थानीय की एनएसएस यूनिट व राजनीति विज्ञान विभाग डॉ. भीमराव अम्बेडकर के जीवन और दर्शन पर एक ज्ञानवर्धक व्याख्यान आयोजित किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में पेशे से महान वकील और डॉ. भीमराव अंबेडकर जी के प्रपौत्र श्री राजरत्न अम्बेडकर जी पधारे। उनके साथ सेवानिवृत्त आईआरएस श्री एल.आर.नय्यर भी इस समारोह की अध्यक्षता कर रहे थे। प्राचार्य डॉ. राजेश कुमार ने उनका स्वागत करते हुए कहा कि डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी ने अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा ज्ञान की खोज में बिताया और फिर उस ज्ञान के माध्यम से उन्होंने लोक कल्याण के हित में अपना समस्त जीवन लगा दिया परंतु उनका दर्शन केवल किताबों का एक हिस्सा बनकर रह गया। डॉ. राजरत्न अम्बेडकर ने अपने संबोधन में बताया कि डॉ. भीमराव अंबेडकर जी लोकतंत्र की सच्ची छवि, राजनीतिक दलों पर पूंजीवाद के प्रभाव से मुक्त भारत देखना चाहते थे। उन्होंने यह भी चिंता व्यक्त की कि जहां राजनीतिक व्यवस्था का काम कानून बनाकर देश को विकास की ऊंचाइयों पर ले जाना है। बाबासाहेब का मत था कि जब तक सरकार के सामने विपक्ष मजबूत नहीं होगा तब तक देश का विकास नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि देश विभिन्न दलों, जातियों, विभाजनों, राष्ट्रों, सम्प्रदायों और धर्मों के जाल में बुरी तरह फंस गया है। नतीजतन, केवल 35% वोट पाने वाली पार्टी शासन करती है, जबकि 65% वोट अलग-अलग पार्टी के झंडों के नीचे घूमते हैं। उन्होंने इन विचारों को डीएवी कॉलेज की यूथ पार्लियामेंट के विद्यार्थियों के सामने रखा। गौरतलब यह भी है कि आज ही के दिन 71 वर्ष पूर्व अक्टूबर 1951 को डॉ. भीमराव अंबेडकर जी ने डीएवी कॉलेज जालंधर में पहली युवा संसद को संबोधित करते हुए भारत में संसदीय लोकतंत्र के भविष्य पर चर्चा करते हुए कहा कि भारतीय लोकतंत्र के इतिहास की जड़ें बहुत मजबूत हैं। उन्होंने कहा था कि युवा देश का भविष्य हैं और संसद में युवाओं को ही पहुंचना चाहिए। इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे श्री एलआर नय्यर ने कहा कि हमारे राजनीतिक दलों को निष्पक्ष तरीके से संविधान को लागू कर देश को प्रगति की ऊंचाइयों पर ले जाना चाहिए। डॉ. दिनेश अरोडा ने डॉ. अम्बेडकर जी के जीवन की घटनाओं को याद करते हुए उन्हें एक महान विचारक, विद्वान और”ज्ञान का प्रतीक” बताया। कार्यक्रम समन्वयक प्रो. एस. के. मिडडा ने सभी का धन्यवाद करते हुए इस बात पर जोर दिया कि डॉ. अम्बेडकर जी की विचारधारा को न केवल “दलित समाज के मसीहा” के चश्मे से देखा जाना चाहिए बल्कि समग्र लोक कल्याण के इरादे से सभी को पढ़ना, विचार करना और व्यवहार में लाना चाहिए। मंच संचालन की भूमिका प्रो. राजविंदर कौर ने किया। इस मौके पर श्री जे.सी. जोसी, पंजाबी विभाग के पूर्व प्रमुख डॉ. जीसी कौल, श्री गुरदेव चंद, प्रो. सोनिका दानिया, डॉ. सुनील ओबेरॉय, कार्यक्रम अधिकारी डॉ. साहिब सिंह और डॉ. गुरजीत कौर, प्रो. कोमल सोनी व प्रो. जसलीन विशेष रूप से उपस्थित थीं।

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