भारत की वेधशाला ने पूरे किए 50 साल, अंतरिक्ष खोज में निभाई भूमिका - News 360 Broadcast
भारत की वेधशाला ने पूरे किए 50 साल, अंतरिक्ष खोज में निभाई भूमिका

भारत की वेधशाला ने पूरे किए 50 साल, अंतरिक्ष खोज में निभाई भूमिका

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न्यूज़ 360 ब्रॉडकास्ट ( नेशनल न्यूज़ ) : India’s observatory completes 50 years, played a role in space exploration: तमिलनाडु के कवलूर में वेणु बापू वेधशाला में 40 इंच के टेलीस्कोप की कई तारकीय खोजों को इस वर्ष 15-16 दिसंबर को इसके संचालन के 50 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में समारोह का आयोजन किया गया। प्रोफेसर वेणु बप्पू द्वारा स्थापित इस टेलीस्कोप ने यूरेनस ग्रह के चारों ओर रिंग की उपस्थिति, यूरेनस के एक नए उपग्रह गेनीमेड के चारों ओर एक वातावरण की उपस्थिति जैसी प्रमुख खोजों के साथ ही खगोल विज्ञान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जो बृहस्पति का एक उपग्रह है। 1960 के दशक तक, यह स्पष्ट था कि भारत को आधुनिक खगोल विज्ञान में अनुसंधान करने के लिए एक उच्च-गुणवत्ता वाली ऑप्टिकल वेधशाला की आवश्यकता पड़ेगी और तब एक व्यापक खोजबीन के बाद, प्रोफेसर वेणु बप्पू ने ऐसी वेधशाला के लिए कवलूर को उपयुक्त स्थान के रूप में चुना। कवलुर के ऊपर का आकाश उत्कृष्ट था और इसका दक्षिणी छोर इससे उत्तरी और दक्षिणी क्षेत्रों के आकाशों के अधिकतर भाग को देखा जा सकता था। वेधशाला का संचालन शुरू होने के कुछ वर्षों बाद प्रो. बापू ने जेना (तत्कालीन पूर्वी जर्मनी) के कार्ल जीस को 40 इंच के टेलीस्कोप के लिए ऑर्डर दिया जिसे बाद में 1972 में स्थापित किया गया था।

इस टेलीस्कोप के दर्पण का व्यास 40 इंच (अथवा 102 सेमी) है और इसे 1972 में स्थापित किया गया था और इसके तुरंत बाद ही इस वेधशाला ने महत्वपूर्ण खगोलीय खोजों की जानकारी देनी शुरू कर दी थी। इस टेलीस्कोप पर एक पीढ़ी से अधिक के खगोलविदों को भी प्रशिक्षित किया गया था। इंजीनियरों द्वारा प्राप्त विशेषज्ञता ने भारतीय खगोलभौतिकी संस्थान को 1980 के दशक में पूरी तरह से स्वदेशी 90-इंच (2.34 मीटर) वाले टेलीस्कोप बनाने में सक्षम बनाया।

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