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शरीर को स्वस्थ रखने के लिए इन अंगों का रखे ख्याल

शरीर को स्वस्थ रखने के लिए इन अंगों का रखे ख्याल

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Health Care Tips In Hindi To Live Healthy Lifestyle

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि हमारे शरीर के सभी अंगों की अपनी अपनी अलग भूमिका होती है। जिस प्रकार शरीर के सारे अंगो का कार्य एक दूसरे पर निर्भर करता है वैसे ही अन्य अंगों के कार्य भी एक दूसरे पर निर्भर है यह एक परिवार की तरह काम करते हैं यदि परिवार का कोई सदस्य बीमार पड़ता है इसका असर घर के अन्य सदस्यों पर भी पड़ता है ठीक उसी तरह हमारे शरीर के विभिन्न अंगों के साथ भी ऐसा ही होता है। हृदय, लीवर, फेफड़े और किडनी भी एक परिवार की तरह है अगर इनमें से कोई भी अंग प्रभावित होता है उसका असर अन्य अंगों पर भी पड़ सकता है इसके कारण कई तरह की बीमारियां हो सकती है हम लोग बीमार हो रहे इसका संकेत कई बार हमारी सेहत दे देती है। इन संकेतों को पहचाने और अपने आप को स्वस्थ रखें।

लीवर का स्वस्थ जुड़ा हुआ है पेट से

लीवर हमारे शरीर का एक अभिन अंग है लीवर भोजन पचाने से लेकर सेहत बनने तक सैकड़ों काम करता है यह शरीर को संक्रमण से लड़ने, ब्लड शुगर और नियंत्रित करने, शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने, बसा कम करने और कार्बोहाइड्रेट्स को स्टोर करने से लेकर प्रोटीन बनाने में मदद करता है। लिवर को स्वस्थ रखना बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। लीवर में यदि कोई दिक्कत है तो उसको असर किडनी पर भी पड़ता है उल्टी होना, कम भूख लगना, थकावट, दस्त लगना, त्वचा या आंखों का पीला पड़ जाना, पेट में दर्द या सूजन पेशाब का रंग गहरा होना,मल में पीलापन लगातार, वजन घटना , मुंह से दुर्गंध आना, शरीर में खुजली होना आदि लक्षण लीवर के बीमार होने की तरफ इशारा करते है।

कैसे रखा जाये लीवर का ख्याल

लिवर को स्वस्थ रखने के लिए अनुशासित जीवन शैली का होना बहुत जरूरी है। इसमें खान-पान से लेकर फिटनेस पर ध्यान दें शराब और सिगरेट से दुरी बनाये रखें , जंक फूड से परहेज रखें या बिलकुल ही ना खाएं, संतुलित मात्रा में आहार लें। चाय या कॉफी की जगह ग्रीन टी ले चुकंदर व सलाद जरूर लें लहसुन का सेवन भी लिवर को स्वस्थ रखने में मदद करता है।

अगर सांस लेने में कोई परेशानी है तो मतलब फेफड़ों से रिलेटेड प्रॉब्लम है

अगर आपको सांस लेने में कोई परेशानी है तो इसका मतलब कि आपके फेफड़ों में कोई दिक्कत है यदि आप प्रति मिनट 12 से 20 बार सांस लेते हैं तो वह आपके फेफड़ों के सामान्य होने का लक्षण है पर यदि यह संख्या प्रति मिनट में इस से बढ़ती या घटती है तो यह फेफड़ों में होने वाली समस्या का संकेत ही है। इसके अलावा खांसी आना लंबे समय से तक खांसी रहना खांसी के साथ खून आना व्याम के बाद सांस लेने में तकलीफ होना,कफ समस्या लगातार बनी रहना, फेफड़ों में संक्रमण के चलते मुंह से दुर्गंध आना, वजन तेजी से घटने लगना या हंसते समय सीने में दर्द होना भी फेफड़ों से संबंधित समस्या हो सकती हैं।

कैसे रखा जाये फेफड़ों का ख्याल

ध्रूम – पान फेफड़ों को सबसे ज्यादा बीमार बनाता है सिगरेट के धुएं के अलावा वातावरण की विशाल वायु से भी बचना चाहिए। यदि आप किसी ऐसी जगह रहते हैं जहां आसपास फैक्ट्रियां हैं, और वायु दूषित रहता है तो मास्क लगा कर रखें। कई बार घर के अंदर का वातावरण भी शुद्ध रहता है इसके लिए हमेशा घर में साफ सफाई रखें हाथों और पैरों को हमेशा साफ रखें और कुछ भी खाने से पहले हाथों को साबुन से धोएं , अल्कोहल युक्त सैनिटाइजर का भी इस्तेमाल करें फेफड़ों को स्वस्थ रखने के लिए रोजाना अनुलोम-विलोम या प्राणायाम करें, जिससे फेफड़ों की कसरत हो सके।

ह्रदय हमारे शरीर का अभिन्न अंग है

कई वार हम हृदय में होने वाली दिक्कतों को नज़र अंदाज़ क्र जाते है जोकि वाद में  गंभीर बीमारियों की तरफ इशारा करते है। लेकिन  कुछ संकेत ऐसे भी होते हैं जो लगते फेफड़ों की समस्या है लेकिन उनका असर हृदय पर होता है।  कभी-कभी सांस फूलने जैसी तकलीफ को हम फेफड़ों से संबंधित समज बैठते हैं परंतु यह हार्ट अटैक या फिर हृदय संबंधी अन्य बीमारियों के संकेत भी हो सकते हैं जब हार्ट अटैक या फिर हृदय संबंधी समस्या के कारण दिल की मांसपेशियां कमजोर होती है और पंपिंग को कम कर देती हैं। तब रक्त बाहर ना जाकर वापस फेफड़ों में जाने लगता है ेऐसी  स्थिति को हम अस्थमा समझ बैठते हैं जबकि यह हृदय संबंधी रोग होता है इसी तरह सीने में भारीपन या दर्द रहना थकान और कमजोरी महसूस धड़कन की गति तेज होना चक्कर आना अधिक पसीना आना गले और जबड़े में हमेशा दर्द रहना जो कि सीने में दर्द और दबाव के कारण हो सकता है  यह सभी ह्रदय रोग से सम्बंदित  संकेत हो सकते  हैं।

कैसे रखा जाए ख्याल  हृदय को स्वस्थ रखने के लिए

नियमित व्यायाम योग व प्राणायाम करें।  रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल होने पर लापरवाही ना करें।  समय-समय पर जांच करवाते रहें।  साफ़ सुथरा लें ,आहार में  तेल की मात्रा कम रखें , रोज सलाद और फल खाएं। ध्रूम -पान हृदय के लिए सबसे ज्यादा  घातक है इसलिए ध्रूम -पान से  दूरी बनाए रखें।  जब आप की उम्र 45 वर्ष और उससे अधिक हैं तो जितनी भूख है उससे से अधिक ना खाएं क्योंकि इससे हृदय की क्रिया और गति दोनों प्रभावित हो सकती हैं।  उच्च रक्तचाप ,उच्च कोलेस्ट्रॉल और अधिक वजन को नियंत्रित रखें। तनाव से दूर रहने की कोशिश करें। 

किडनी

किडनी भी हमारे शरीर का एक बहुत बड़ा अभिन्न अंग है किडनी रक्त को साफ करने के साथ-साथ शरीर से गंदगी को भी बाहर निकालती है।  इसलिए जब किडनी खराब  होने लगती है तो शरीर में भी कई तरह के बदलाव देखने को मिलते  हैं।  किडनी में कई तरह के रोग होते हैं। जैसे पथरी, क्रॉनिक, किडनी डिजीज, किडनी की सूजन, रिनल कैंसर इत्यादि।  यदि किडनी में किसी प्रकार की समस्या है या फिर समस्या उत्पन्न होने वाली है तो आंखों या पैरों में सूजन हो सकती है इसके अलावा हाई ब्लड प्रेशर की समस्या, सांस फूलना, त्वचा में खुजली होना ,मांसपेशियों में मरोड़ या भूख कम लगना, अत्याधिक प्यास लगना गाढ़े रंग की पेशाब आना ,बार-बार पेशाब आना जैसी समस्याएं इसकी तरफ संकेत करती हैं।

 

ऐसे रखें किडनी का ख्याल 

बाहर का भोजन अधिक खाने से बचें,घर का बना शुद्ध खाना ही खाए। आहार में ज्यादा से ज्यादा हरी पत्तेदार सब्जियां फल और सलाद सम्मिलित करें बहुत ज्यादा दवाइयों का इस्तेमाल ना करें क्योंकि इससे किडनी पर असर पड़ता है और इसके खराब होने की आशंका बनी रहती है।  एंटीबायोटिक दवाइयों का सेवन डॉक्टर के कहने पर ही करें ज्यादा इस्तेमाल ना करें।  किसी भी हर्बल सप्लीमेंट को अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।  खाने में अधिक नमक का इस्तेमाल ना करें इससे उच्च रक्तचाप और किडनी में समस्या हो सकती है। आहार में गोभी, शिमला मिर्च, प्याज ,लहसुन  आदि शामिल करें। मछली खाएं क्योंकि इसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड पाया जाता है जो किडनी की समस्याओं को दूर करने के लिए फायदेमंद है। काला तिल खाएं इसमें विटामिन , फाइबर ,प्रोटीन, पोटेशियम, सेलेनियम ,मैग्नीशियम ,कैल्शियम, आयरन और जिंक जैसे आवश्यक पोषक तत्व पाए जाते हैं। दालों का सेवन करें खासकर उड़द, मूंग और अरहर की दाल ऐसे खाद्य शामिल करें जिनमें प्रोटीन, कैल्शियम, पोटेशियम, आयरन जैसे आवश्यक पोषक तत्व पाए जाते है।

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