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धुप से आँखों में होनी वाली समस्या और उनके बचाव

धुप से आँखों में होनी वाली समस्या और उनके बचाव

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अल्ट्रावायलेट किरणें आँखों के हर हिस्से को करती है प्रभावित

 

एडिटोरियल: आँखों को धुप से सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है। सूरज की तेज़ रौशनी और अल्ट्रावायलेट किरणें आँखों के हर हिस्से को प्रभावित करती है। जिससे कई बार इनका दुष्प्रभाव आँखों से जुड़े रोगो के जोखिम को बढ़ा देता है। युवी किरणें चाहे सूर्य के प्रकाश से हो या कुमित्र उपकरणों से निकलने वाली, यह आँखों की सतह के ऊतकों के साथ-साथ कॉर्निया और लेंस को भी नुक्सान पहुंचा सकती है।

 

आँखों की पुतली पर असर
लम्बे समय तक सूर्य के संपर्क में रहने से टेरिजियम हो सकता है। जिसे नाखूना भी कहा जाता है। यह आँखों के सफ़ेद हिस्से और पुतली को प्रभावित करता है। इस दौरान आँखों में धीरे-धीरे सफेदी वाली संरचना फीकी पड़ जाती है। यह समस्या आमतौर पर दोपहर के समय सूर्य की किरणों के बीच ज्यादा समय बिताने से होती है।

 

फोटोकेरटाइटिस का खतरा
धुप से फोटोकेरटाइटिस हो सकती है, जिसमे आँखों में लालिमा, नज़र में धुंदलापन और आँखों में हल्का दर्द हो सकता है। दोपहर के समय सूर्य की रौशनी सबसे तेज़ होती है, जो कॉर्निया को नुकसान पहुंचा सकती है। ऐसे में रेत की सतह पर पड़ने वाली पैराबैंगनी किरणें कॉर्निया को प्रभावित कर सकती है। ऊंचाई पर पैराबैंगनी किरणें बर्फ से परावतिर्त होकर आँखों को नुकसान पहुंचाती है।

 

आँखों के लेंस का धुंदला होने की समस्या
धुप के प्रभाव से मोतियाबिंद होने का भी खतरा है। मोतियाबिंद (अधिकांशत) बुढ़ापे के परिमाणस्वरूप होता है। लेकिन सूरज की घातक युवी किरणों से यह समस्या कम उम्र के लोगों में भी हो सकती है। इसमें आँखों का लेंस धुंदला हो जाता है। देर तक धुप में रहने से कोट्र्रियल कैटरेक्ट का जोखिम दोगुना हो जाता है। हालाँकि मोतियाबिंद और आँखों के कैंसर को विकसित होने में वर्षो लग जाते है।

अंधेपन का जोखिम
युवी प्रकाश के संपर्क से मैकुलर डिजनरेशन होने का खतरा रहता है, जो रेटिना को नुकसान पहुंचाता है। जो उम्र से सम्भंदित अंधेपन का प्रमुख कारण भी है।

 

कैसे करें बचाव?

  • आँखों के बचाव के लिए न्यूट्रल ग्रे, एम्बर, भूरे और हरे रंग वाले सनग्लासेस का चयन करना उचित है।
  • कभी भी सूर्य की और सीधे न देखे
  • ग्रहण के दौरान सूरज को सीधे देखना आँखों के रेटिना को नुकसान पहुंचा सकता है।
  • हमेशा 100 फीसदी युवी या युवी-400 सुरक्षा देने वाला धुप का चश्मा पहने।
  • चश्मे के साथ चौड़ी टोपी भी पहने, तांकि आँखों के आस-पास का हिस्सा धुप से बचाया जा सके

 

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