के.एम.वी. के डॉ. मधुमीत द्वारा अनुवादित कहानियां साहित्य अकैडमी-दी नेशनल एकेडमी ऑफ लेटरज़ द्वारा प्रकाशित

के.एम.वी. के डॉ. मधुमीत द्वारा अनुवादित कहानियां साहित्य अकैडमी-दी नेशनल एकेडमी ऑफ लेटरज़ द्वारा प्रकाशित

 

एजुकेशन डेस्क: कन्या महाविद्यालय, जालंधर के डॉ. मधुमीत,अध्यक्षा, पोस्ट ग्रेजुएट डिपार्टमेंट ऑफ इंग्लिश द्वारा समथिंग अनस्पोकन टू शीर्षक के अंतर्गत पुस्तक में अनुवादित कहानियां साहित्य अकैडमी द्वारा प्रकाशित होने पर विद्यालय प्रिंसिपल प्रो. अतिमा शर्मा द्विवेदी द्वारा सम्मानित किया गया.

इन कहानियों के संबंध में जानकारी देते हुए डॉ. मधुमीत ने बताया कि इस संग्रह में बहुत सी कहानियां कला के विलक्षण पहलुओं की गवाही देती है जिस द्वारा मनुष्य मानवीय उद्देश्य तथा कार्यों की जटिलता को समझने की कोशिश में छुपी जटिल एवं रहस्यमई अवधारणाओं की खोज करता है. इस अवसर पर संबोधित होते हुए विद्यालय प्रिंसिपल प्रो. अतिमा शर्मा द्विवेदी ने डॉ. मधुमीत को बधाई दी और बताया कि शिक्षा के क्षेत्र के साथ जुड़े होने के साथ-साथ डॉ. मधुमीत विभिन्न गैर सरकारी संस्थाओं जैसे:-लायंस क्लब, दस्तक, गूंज, अल्फा महिंदरू फाउंडेशन, फोगसी,नारची आदि के साथ जुड़कर समाज सेवा में अपना योगदान डाल रहे हैं और इस विशेष योगदान के लिए उनको मदर टेरेसा अवार्ड, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया द्वारा बेस्ट टीचर अवॉर्ड , भारतीय साहित्य परिषद, कोलकाता द्वारा युवा पुरस्कार आदि के साथ सम्मानित किया जा चुका है.

उल्लेखनीय है कि एम.ए. इंग्लिश में गोल्ड मेडल हासिल करने के साथ-साथ यूनिवर्सिटी में एम.फिल में पहला स्थान प्राप्त करने वाले डॉ. मधुमीत ने इंडो एंगलियन लिटरेचर में पी.एच.डी. की. अपने अनुवाद के कार्य के लिए उनको खूब सराहना मिली है.  साहित्य अकैडमी- दी नेशनल एकेडमी ऑफ लेटरज़, नई दिल्ली के ट्रांसलेटर के तौर पर प्रयासरत डॉ. मधुमी द्वारा 4 पुस्तकें लिखने के साथ-साथ राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में 70 प्रकाशन किए जा चुके हैं. इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय तथा राष्ट्रीय सेमिनारओं ,कॉन्फ्रेंसओं तथा वर्कशॉप में 45 रिसर्च पेपर्स की पेशकारी भी उनके हिस्से आई है. इसके अलावा डॉ. मधुमीत द्वारा थीमेटिक- इंटरनेशनल जर्नल ऑफ अमेरिकन लिटरेचर, दी लिटरेचर अंब्रोसिया, सीनिधि -जर्नल ऑफ इंग्लिश राइटिंग आदि की संपादकीय जिम्मेदारियां भी निभाई जा रही है.

CATEGORIES
Share This

COMMENTS

Wordpress (0)